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Christmas tree

क्रिसमस ट्री की कहानी क्या है? Christmas Tree story in hindi

दिसंबर का महीना, जाड़े का मौसम। christmas में क्रिसमस ट्री की सजावट।

और हम सभी जानते हैं। 25 दिसंबर को ईसाइयों का मुख्य त्यौहार क्रिसमस मनाया जाता है। बड़ा दिन या क्रिसमस मनाने की तैयारी ज़ोर-शोर से शुरू हो जाती है। हम देखते हैं लोग घरों के ऊपर तारे लगाते हैं। क्रिसमस ट्री बनाया जाता है। उसे बहुत ही आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। आजकल तो हमें घरों पर ही नहीं लेकिन दुकानों और मॉल्स में भी क्रिसमस ट्री की सजावट देखने को मिल जाती है। क्रिसमस ट्री वाली कहानी जानने से पहले, चलिए मैं आपको बताता हूँ आख़िर क्या है क्रिसमस ट्री ?

क्रिसमस ट्री क्या है?

क्रिसमस ट्री एक सदाबहार पेड़ है। जिसे क्रिसमस के मौके पर बहुत ही सुन्दर और आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। यह Christmas Tree पिरामिड आकार का होता है। और ऊपर में एक सितारा लगाया जाता है। इस ट्री पर कागज़ के फूल, बत्ती की लड़ियाँ, चॉक्लेट्स, gifts, bells आदि से सजाया जाता है।

क्रिसमस ट्री से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं। ये कहानियां बहुत ही रोचक हैं। क्रिसमस ट्री की कहानी चाहिए तो आगे पढ़ते रहिये।

क्रिसमस ट्री की कहानी क्या है? What is the story of Christmas tree in Hindi ?

  1. एक संत थे। संत बोनिफेस। ऐसी मान्यता है कि संत बोनिफेस ने इंग्लैंड छोड़ दिया। और ईश्वर का सन्देश सुनाने के लिए जर्मनी चले गए। वहां उनकी मुलाक़ात कुछ लोगों से हुई। वे अपने भगवान् को खुश करने के लिए एक ओक के पेड़ के नीचे, एक नन्हे बालक की बलि चढाने की तैयारी कर रहे थे। यह देखकर संत बोनिफेस बेहद दुःखित हुए। और वे क्रोधित हो उठे।

उन्होंने उस वृक्ष को कटवा दिया। उसके स्थान पर एक नया सदाबहार फर का वृक्ष लगवाया। जो बर्फ़ पड़ने पर भी हरा- भरा रहता था। इस वृक्ष को संत बोनिफेस के अनुयाइयों ने सजाया। और यह christmas tree एक प्रतीक बन गया।

2. पूर्वी जर्मनी, पोलैंड और फ़िनलैंड में एक अन्य कहानी प्रचलित है। एक परिवार था जो बहुत ही ग़रीब था। उनके पास ट्री को सजाने के पैसे नहीं थे। उन्होंने pine ट्री को काटा और घर के अंदर रख दिया। सुबह चिड़ियों की चहचाहट से बच्चों की नींद खुली। तो वे दंग रह गए। पाइन ट्री को किसी मकड़ी ने सुनहरे जालों से बुन दिया था। और ये बहुत ही खूबसूरत लग रहा था। बच्चे हों या बड़े, सभी ख़ुशी से झूम उठे। इस प्रकार के क्रिसमस ट्री को ” पौचकी ” कहा जाता है

ये तो थीं क्रिसमस ट्री पर कुछ प्रचलित कहानियाँ। अब हम देखते हैं आख़िर कैसे बनाया जाता है क्रिसमस ट्री ?

क्रिसमस ट्री किससे बनाया जाता है ?

एक सुन्दर सा क्रिसमस ट्री बनाने में, सदाबहार पेड़ का उपयोग किया जाता है। जैसे बालसम, डगलस या फ़र के वृक्ष। सदाबहार फर का पेड़ जिसे सनोबर भी कहते हैं, कभी नहीं मुरझाता है। यह पेड़ बर्फ से पूरी तरह से ढँक जाने पर भी हरा- भरा रहता है।

फिर इसे सितारों, फूलों, मोमबत्तियों, गिफ्ट्स, चॉक्लेट आदि से सजाया जाता है। छोटे- छोटे खिलौने भी टांगे जाते हैं। सबसे ऊपर एक चमकता सितारा भी लगाया जाता है। जो प्रभु यीशु के जन्म का प्रतीक है।

क्रिसमस ट्री का इतिहास क्या है ? What is the history of Christmas Tree in hindi ?

यूँ तो सदाबहार पेड़ों से मंदिरों को सजाने की परंपरा रोमन वासियों में ही था। ” सत्रुनालिए ” पर्व के अवसर पर रोमन वासी मंदिर को सदाबहार पेड़ से सजाया करते थे। वहीँ मिस्र के लोग भी खजूर के हरे पत्तों का उपयोग अपने ईश्वर रा को प्रसन्न करने के लिए किया करते थे।

आधुनिक काल के क्रिसमस ट्री की उत्पत्ति का श्रेय जर्मन को दिया जाता है। 16 वीं सदी के दौरान जर्मन प्रोस्टेटंट क्रिस्चियन लोगों ने अपने घरों में फर का पेड़ लाया। उसे सेबों से सजाया। इस पेड़ को वे 24 दिसंबर की शाम यानि कि क्रिसमस पर्व की पूर्व संध्या पर, अपने घरों को ले जाते हैं। यह Eden Garden का प्रतीक है। और सुख समृद्धि का द्योतक भी है।

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वर्तमान समय में जीवित वृक्षों को काटकर क्रिसमस ट्री बनाने का परिचलन कम हो गया है। कृत्रिम पेड़ बनाये जाते हैं। जिसमे प्लास्टिक और इलेक्ट्रिक लाइट्स का उपयोग किया जाता है।

हमने क्या जाना?

आप में से कई लोग क्रिसमस या बड़ा दिन के बारे अवश्य जानते होंगे। पर क्रिसमस ट्री के पीछे की कहानी नहीं जानते थे होंगे। उम्मीद है ये जानकारी अच्छी लगी। आप इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं।

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